बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से हर एक को ए, बी और सी में किया वर्गीकृत , जाने क्या है ये तीन श्रेणियां,

(संवादाता  समीना एजाज की रिपोर्ट)

 

पश्चिम बंगाल में फिलहाल चुनाव चल रहे हैं। इस चुनाव को लेकर हर दिन कोई न कोई नइ खबर मिलती रहती है । इसी बीच बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से हर एक को तीन श्रेणियों, ए, बी और सी में से एक में वर्गीकृत किया है। विधानसभा सीट पर चुनावी लड़ाई के हिसाब से उन्हें बांटा गया है। कुछ भाजपा नेताओं के अनुसार A का अर्थ है आसान जीत, B का अर्थ है मुकाबला है। C का अर्थ है काफी कठिन मुकाबला ।

 

नंदीग्राम को रखा गया बी श्रेणी में

 

बीजेपी  ने नंदीग्राम सीट, जहां टीएमसी की नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेदु अधिकारी के बीच मुकाबला है, उसे बी श्रेणी में रख दिया है। एक जरूरी बता आपको दें कि प्रधानमंत्री ने आज भी एक रैली के दौरान कहा था कि ममता बनर्जी नंदीग्राम में सेल्फ गोल कर चुकी  है। वह इस चुनाव को हार चुकी हैं और उनका गुस्सा इसकी गवाही दे रहा है।

 

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से हर एक को  ए, बी और सी में किया वर्गीकृत , जाने क्या है ये तीन श्रेणियां,

 

 

A कैटगरी में है नंदीग्राम सीट-कैलाश विजवर्गीय 

 

हालांकि बीजेपी का यह कहना है कि इन 294 सीटों में से कोई भी सीट मुश्किल नहीं है। बंगाल बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजवर्गीय यह कहना है कि  , “ऐसा पहली ही बार है जब हमारी पार्टी राज्य भर में कुल 1,00,000 मतदान केंद्रों में से 80,000 पर आ गई है। हमने उन्हें वर्गीकृत कर दिया है। लेकिन फिर भी यह हमारी आंतरिक तैयारी है और हमारी रणनीति का हिस्सा है। हम यह आशा करते हैं कि सीट किसी भी कैटेगरी में हो, लोग हमें ही वोट देंगे।” गृह मंत्री अमित शाह भी अपनी हर रैली में कम से कम 200 सीटें जीतने की बात दोहराते हैं।।

 

कैलाश विजयवर्गीयसे ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नंदीग्राम सीट बीजेपी की एक कैटगरी में आती है।  सीटों को ए, बी और सी कैटेगरी में बाटने का काम बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकारों ने किया  है और यह लिस्ट बीजेपी के कुछ शीर्ष नेताओं और प्रचारकों के पास है।

 

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से हर एक को  ए, बी और सी में किया वर्गीकृत , जाने क्या है ये तीन श्रेणियां,

 

 

नंदीग्राम सीट पर बीजेपी को मिल सकती है बढत

 

बीजेपी के एक नेता का यह कहना है कि नंदीग्राम सीट पर उन्का मुकाबला है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि बीजेपी को इसमें बढ़त भी मिल सकती है। इसी तरह, टॉलीगंज जहां से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो इस चुनाव को लड़ रहे हैं, उसे भी बी श्रेणी में ही वर्गीकृत किया गया है। बाबुल सुप्रियो ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें बहुत ही कठिन सीट दी गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह फिर भी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र के वर्गीकरण को लेकर  उन्होंने कहा, “यह संगठन के द्वारा उन निर्वाचन क्षेत्रों की गंभीर और जमीनी आकलन है, जिन्हें अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता है।”

 

सी कैटेगरी की सारी सीटें

 

बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल यामी की पार्टी की सी कैटेगरी की सीटों में ज्यादातर दक्षिण बंगाल के हैं। इनमें बारानगर,स्वरूपनगर, बसंती, जगतबॉलपुर,  मुरारई,मनबाजार, नलगोटी और खंडागोश शामिल हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस का ही वर्चस्व है।

 

बी कैटेगरी सी सारी सीटें

 

बी कैटगरी सीटों की बात करें तो उनमें नंदीग्राम, मोयना,सिताई,  रायपुर, गलसी, कोटुलपुर, इंदास,  कटवा, मेमारी और यहां तक ​​कि तारकेश्वर जहां से राज्यसभा सांसद और पत्रकार स्वपन दासगुप्ता भी चुनाव लड़ रहे हैं। दासगुप्ता ने इस पर कहा, “मैं इस पर बिल्कुल भी टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि मैं इस तरह के सर्वेक्षण में कभी शामिल नहीं हुआ।”

 

ए कैटेगरी की सारी सीटें

भाजपा के लिए सबसे आसान और श्रेणी ए की सीटों में बिष्णुपुर, ओंदा, आसनसोल (दक्षिण), पारा,  शिबपुर, खेजुरी, मेदिनीपुर, जॉयपुर, हावड़ा उत्तर शामिल हैं। हावड़ा के अलावा, बीजेपी के लिए ए कैटेगरी की ज्यादातर सीटें राज्य के पश्चिमी हिस्सों में से हैं।

 

राज्यसभा में टीएमसीसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने यह कहा कि, “हम बंगाल को जीत रहे हैं। हमने नंदीग्राम को भी जीत लिया है। यहां पर चुनाव लड़ने वाला एकमात्र केंद्रीय मंत्री चुनाव हार जाएंगे।”

 

प्रोफेसर द्वैपायन भट्टाचार्य (जेएनयू में राजनीति विज्ञान के ) ने वर्गीकरण के पीछे के तर्क को समझाते हुए कहा, “बंगाल के पश्चिमी जिलों में भाजपा ने  बेहतर किया है, इसलिए वे उन्हें  आसान सीटों के रूप में वर्गीकृत करते हैं। दुसरी और दक्षिणी और पूर्वी बंगाल में, टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोपों के बावजूद, इसकी संगठनात्मक उपस्थिति है, इसलिए भाजपा को कुछ  विरोध का सामना भी करना पड़ेगा।”

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