वेनेजुएला में लागू की गई नोटबंदी का फ़ैसला टला, नागरिकों ने किया भारी विरोध

भारत में नोटबंदी के फैसले के बाद लोग भले ही परेशान हों मगर भारत के बाद वेनेजुएला में लागू की गई नोटबंदी को नागरिकों के भारी विरोध के कारण वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने 2 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। भारत की तर्ज पर हुई नोटबंदी में वेनेजुएला की सरकार ने 100 बोलिवर के नोट को चलन से बाहर किया था। इसके बदले वेनेजुएला सरकार ने 500, और 20,000 बोलिवर की नयी करेंसी जारी की थी। सरकार ने अब 2 जनवरी तक 100 बोलिवर के नोट को चलाए जाने की इजाजत दी है। इसके आगे क्या होगा इस को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

टेलीविजन पर मादुरो ने कहा कि आप शांतिपूर्वक रुप से 100 बोलिवर के नोट को खरीददारी व अन्य गतिविधियों के लिए अस्थायी तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। हालांकि कोलंबिया और ब्राजील के साथ लगी सीमाएं बंद रहेंगी जिसके लिए उन्होंने दावा किया था कि माफिया वेनेजुएला के पैसों को देश से बाहर ले जा रहे हैं।

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गौरतलब है कि वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में 100 बोलिवर के नोट का हिस्सा 77 फीसदी है। लोगों को नोट बदलने के लिए केवल 72 घंटे का समय दिया गया, लेकिन इस अनुपात में नयी करेंसी को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। वेनेजुएला की आधी आबादी के पास बैंक खाते नहीं हैं और सरकार ने इसकी कोई जानकारी नहीं जुटाई थी। जिसके कारण नोटबंदी से हर स्तर पर हालात बेकाबू हो गये थे।

नकदी संकट के बाद लोग खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए कार्ड और बैंक ट्रांसफर के जरिए लेनदेन करने के लिए बाध्य हो गए। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि दंगों जैसे हालात में चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया जबकि सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की। इन वारादातों के सिलसिले में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें विपक्षी दल पॉप्युलर विल और जस्टिस फर्स्ट पार्टी के नेता और सदस्य भी शामिल हैं। राष्ट्रपति ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका की शह पर अराजकता की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

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