चाय तरोताजगी का साधन

चाय पीना हर कोई पसंद करता हैं। फिर चाहे वो ऑफिस की चाय हो, घर की चाय हो या फिर नुक्कड़ की चाय सबका अपना अलग ही महत्तव हैं। पहले हम कुछ चाय के फायदे देख लेते हैं फिर चाय की और चर्चा करता है।

चाय में कैफीन और टैनिन होते हैं जिससे शरीर में फुर्ती का एहसास होता है। चाय में मौजूद अमीनो एसिड दिमाग को ज्यादा अलर्ट और शांत रखता है। चाय में एंटीजन होते हैं जो एंटीबैक्टीरियल क्षमता प्रदान करते हैं। चाय बुढ़ापे की रफ्तार को भी कम करती हैं। साथ ही शरीर को उम्र के साथ होने वाले नुकसान से बचाती है। चाय में मौजूद फ्लोराइड हड्डियों को मजबूत करता है और दातों में कीड़ा लगने से भी रोकता है। इतना ही नहीं बल्कि कई रिसर्च यह भी बताते हैं कि चाय कैंसर हाई कोलेस्ट्रॉल एलर्जी लीवर और दिल की बीमारियों में फायदेमंद मानी जाती है।

घर का विषय हो या फिर राजनीतिक विषय हर जगह शुरूआत चाय के कप के साथ हा होती है। उत्तर प्रदेश में एक जगह हैं बलिया जहां पर स्टेशन के नजदीक ही एक दुकान है चाय की जो 24 घंटे चलती हैं. इसलिए क्योंकि एक वक्त में वहां पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर (जनता दल) चाय पीने आते थे। यकीनन आज भी उस दुकान पर चाय तो लोग पीते ही है. साथ ही चाय पर जो राजनीतिक चिंतन होता है, उसका अलग ही अपना महत्व है। कई बार तो मुझे यह लगता हैं कि कहीं बलिया की जमीन उसी चाय की दुकान से एक और प्रधानमंत्री ना दे दे।

इतना ही नही दोस्तो चाय का महत्व इश्क के क्षेत्र में भी है। पहली बार माशूका से मुलाकात में चाय के कप ही लगते थे। क्योकिं गरम चाय को ठण्डा होने में जितना ज्यादा वक्त लगता था, उतनी ही देर माशूका के साथ वक्त गुजारने को मिलता था। तो चाय दो लोगों को मिलाने में भी एक परिचायक की भूमिका निभाती है। तभी हमारे शायर ने कितना खूबसूरत कहा कि…कल रात ख्वाबों में चखा था तेरे लब्बों को,
आज भी चाय मिठ्ठी होती हैं, तो तेरा ख्याल आता हैं…

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