दिल्‍ली-एनसीआर के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने रिहायशी इलाकों में भी पटाखे बेचने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

पटाखा बिक्री पर बैन से आतिशबाजी कारोबार के व्यापारियों को भारी नुकसान होने का अंदेशा है। हर साल 6000 से 6500 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार होता है, जिनमें से 90 फीसदी बिजनेस दीवाली पर होता है। इस साल दीवाली पर ही पटाखे बेचने की अनुमति नहीं होगी तो उनको जबरदस्त नुकसान होगा।

देश की राजधानी दिल्ली और करीबी एनसीआर इलाकों में इस बार दिवाली का त्योहार बिना पटाखों के मनाए जाने की संभावना है। यहां पटाखा बिक्री बैन पर पिछले साल लगाई रोक सुप्रीम कोर्ट ने आज बहाल रखी है। पुलिस की ओर से पटाखा कारोबारियों को दिए गए स्थायी-अस्थायी दोनों ही लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इस साल 12 सितंबर को इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया था, जिसे बहाल रखते हुए एक नवंबर के बाद ही पटाखे बेचने की मंजूरी दी गई है। 12 सितंबर 2017 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री को शर्तों के साथ इजाजत दी थी। इसके बाद अब महाराष्ट्र के रिहायशी इलाकों में भी पटाखे बेचने पर बैन लगा दिया गया है।

बॉंम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि रिहायशी इलाक़ों में पटाखे ना बेचे जाएँ। कोर्ट ने प्रशासन से कहा है की बिक्री के लिए  नए लाइसेसं जारी नहीं किए जाएं। पटाखों पर बैन के बाद राज ठाकरे ने पूछा है कि सिर्फ हिंदू त्याहोरों पर ही बैन क्यों?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुरक्षा के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए ये रोक लगाई है। कोर्ट ने प्रशासन से कहा है कि पटाखों की बिक्री के लिए नए लाइसेसं जारी नहीं किए जाएं। इतना ही नही कोर्ट ने कहा है की पहले से लाइसेंस की संख्या भी आधी की जाए। नासिक के रहने वाले चंद्रकांत लासुरे नाम के शख्स वने बॉम्बे हाईकोर्ट में गैरकानूनी तरीके से हो रही पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

मालूम हो कि पिछले साल भी कुछ बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में पटाखा बैन को लेकर अर्जी डाली थी। सुप्रीम कोर्ट में तीन बच्चों की ओर से दाखिल एक याचिका में दशहरे और दीवाली पर पटाखे जलाने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी। इस अनूठी याचिका को दाखिल करने वाले इन बच्चों की उम्र महज छह से 14 महीने के बीच थी। यह पहला मामला है, जब ऐसा हुआ है कि बच्चे पटाखा बिक्री पर बैन लगाने के लिए कोर्ट के दरवाजे पर जा पहुंचे।

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