जिज्ञासा – भारतीय परंपरा

जिज्ञासा यूं तो जिज्ञासा का अपना एक अलग अर्थ होता है लेकिन जब इस जिज्ञासा का भारतीय समाज में अर्थ देखा जाता है तो हम यह देखते हैं कि जितना जिज्ञासा को भारतीय संस्कृति और भारतीय समाज ने अभिषिक्त किया, उतना किसी और समाज या किसी और संस्कृति ने नहीं। जिझासा का कोई अंत नही हैं। एक बहुत पुरानी कहावत है यह कहानी है आदम हव्वा की आदम हव्वा में यह कहा गया कि हमारे दो पूर्वज ऐसे थे जिनको स्वर्ग के बाघ से फल खाने की इच्छा हुई, जिसे बाद में वर्जित फल भी कहा गया।  पेड़ पर लटकते फल को उन्होंने तोड़ा और खा लिया, उनको क्या पता था कि इसको खाना है या नहीं, जब उन्होंने उस फल को खा लिया तो उन्हें सजा के तौर पर बाहर निकाल दिया गया लेकिन भारतीय समाज में जब एक छोटे बच्चे नचिकेता अपने पिता से सवाल पूछ पूछ कर तंग कर दिया। बात यहीं नही रूकी नचिकेता यमराज के द्वार पर गए और यमराज ने उन्हें जीवन और मृत्यु का ज्ञान दिया। उसकी जिज्ञासा को अभिषिक्त किया। सवाल पूछने की कला और जिज्ञासा हम सब में होनी चाहिए एक छोटा बच्चा ही सवाल पूछे जरूरी नहीं हम सबको सवाल पूछने की आदत होनी चाहिए क्योंकि जब हम सवाल पूछते हैं तो हम चिंतन करते हैं हम खोज करते हैं उत्तर की तलाशते हैं कहीं ना कहीं जिज्ञासा को अभिषिक्त करने की आदत हम सब के पास होनी चाहिए। आज हम देखते हैं कि परिवार में 4 ही लोग हैं और जब छोटा बच्चा ज्यादा सवाल करता है, तो हम परेशान होकर उसे दूसरे कमरे में जाने को या पढ़ने को बोल देते हैं। इस कहानी को लिखने का सिर्फ यहीं एक कारण हैं कि इस भागती दौड़ती जिंदगी में यदि बच्चे हमसे कुछ सवाल करे तो हम उनकी जिज्ञासा का सम्मान करे नाकि परेशान हो जांए।

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