क्राइम फाइल: बाला साहब ठाकरे के बेहद करीबी सचिन वाजे का सूरज कैसे अस्त हुआ, जानिए पूरी कहानी

(संवादाता  समीना एजाज की रिपोर्ट)

 

 उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो मिलने और मनसुख हिरेन हत्या के मामले में मुंबई के टॉप कॉप सचिन वाजे बुरी तरह से घिर चुके हैं। एक जमाना था जब वह शिवसेना के जिगरी यार थे, लेकिन अब उन्के लिए सलाखें गिनने की घड़ी आ गई हैं। चलिए आगे जानते हैं कि पत्रकारिता और राजनीति के गठजोड़ से नाम दाम पाने वाले सचिन वाजे का सूरज कैसे अस्त हुआ…

 

 63 से ज्यादा एनकाउंटर किए, फिर भी वर्दी पर एक भी दाग नहीं लगा 

 

बात साल 1990 की है जब महाराष्ट्र पुलिस में एक सब-इंस्पेक्टर शामिल हुआ। उसका नाम था सचिन वाजे। उन्की पहली पोस्टिंग गढ़चिरौली के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में हुई, लेकिन दो साल के बाद उन्का ठाणे शहर पुलिस में तबादला हुआ।  सचिन वाजे ने 63 से ज्यादा एनकाउंटर किए, लेकिन फिर भी उनकी वर्दी पर कभी भी एक भी दाग नहीं लग पाया।  कुख्यात गैंगस्टर मुन्ना नेपाली   को ठिकाने लगाने के बाद उनकी शोहरत आसमान छूने लगी। कई साल तक ठाणे में पोस्टिंग के कारण वह स्थानीय पत्रकारों के बीच काफी मशहूर हो गए और  नेतानगरी में भी उनकी पकड़ मजबूत होती चली गई।

 

 दया नायक से सचिन का कॉम्पिटिशन होता था 

 

सूत्रों के अनुसार उस वक्त  के  सीआईयू के इंचार्ज प्रदीप शर्मा ही सचिन वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) में लाए थे। पत्रकारों से उनका मेल-मिलाप काफी अच्छा था और यह भी कहा जाता है कि एक पत्रकार के बदौलत ही सचिन वाजे को क्राइम ब्रांच में पोस्टिंग मिली थी। इसके बाद सचिन प्रदीप शर्मा के बेहद करीब होते चले गए, लेकिन उनकी ही टीम में शामिल दया नायक से सचिन का कॉम्पिटिशन शुरू हो गया। मुंबई क्राइम ब्रांच में एक दौर आ गया था, जब दया और सचिन दोनों में एनकाउंटर करने की होड़ शुरू हो गई थी।

 

 किस वजह से हुए थे सस्पेंड 

 

 सचिन वाजे का सितारा मुंबई में  बुलंदी पर था, लेकिन एक केस ने उनकी पूरी जिंदगी की पूरी काया ही पलट दी।  2 दिसंबर साल 2002 की यह घटना है। घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर हुए धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस वक्त मुंबई पुलिस के  कमिश्नर एमएन सिंह ने सचिन वाजे को जांच टीम में शामिल किया तो उन्होंने डॉ. मतीन,जहीर, मुजम्मिल और ख्वाजा यूनुस को गिरफ्तार कर लिया था। सचिन वाजे के मुताबिक मुंबई से औरंगाबाद जाते वक्त ख्वाजा यूनुस फरार हो गया। हालांकि, डॉ. मतीन ने बयान दिया था कि यूनुस को लॉकअप में बहुत ही बुरी तरह से पीटा गया था और इस वजह से ही उसकी मौत हो गई थी। उस बाद यूनुस की मां ने वाजे समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ  केस दर्ज किया, जिसमें वाजे को गिरफ्तार कर लिया गया और जांच के दौरान वाजे को सस्पेंड भी कर दिया गया। यह सारा मामला आज भी अदालत में चल रहा है।

 

 सस्पेंड होने के बनाईं तीन आईटी कंपनी 

 

 सस्पेंड होने के बाद सचिन वाजे ने डिजीनेक्स्ट मल्टीमीडिया, मल्टीबिल्ड इंफ्राप्रोजेक्ट्स और टेक लीगल सॉल्यूशन नाम से तीन आईटी कंपनी का निर्माण किया। इनमें तीनों में से दो कंपनियों को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने बंद कर दिया, जबकि डिजीनेक्स्ट मल्टीमीडिया अभी भी चल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार  सचिन ने इसी कंपनी से काफी अच्छा पैसा बनाय और वह अब भी इसके डायरेक्टर हैं।

 

 बाला साहब ठाकरे के बेहद करीब थे 

 

फिलहाल सचिन वाजे का करियर  अब ढलान पर पहुंचता लग रहा है, लेकिन एक वक्त था जब वह महाराष्ट्र की सबसे ताकतवर शख्सियत बाला साहब ठाकरे के बेहद करीब थे। जब सचिन शिवसेना पार्टी में शामिल हुए तो पार्टी के अंदरूनी लोगों को इस बात पर बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ था। बात कुछ इस तरह थी कि बाला साहब ठाकरे कई बार सार्वजनिक रूप से  सचिन की सराहना कर चुके थे। 3 मार्च 2004 को जब सचिन वाजे को सस्पेंड किया गया तो वह कई साल तक शिवसेना के पार्टी प्रवक्ता के तौर पर काम करते रहे। हालांकि, शिवसेना के नेता का ऐसा कहना है कि  वह कभी पार्टी में सक्रिय नहीं रहे थें। सूत्रों के अनुसार नौकरी से सस्पेंड होने के बाद सचिन को दो बार 2005 और 2007 में दोबारा पुलिस डिपार्टमेंट में लाने का प्रयास भी किया गया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी यह आरोप हैं कि उनका कहना है कि सचिन वाजे को बहाल करने के लिए शिवसेना के नेता लगातार दबाव भी बनाते रहे थे। 

 

 पुलिस विभाग में फिर हुई थी सचिन वाजे की वापसी 

 

 रिव्यू कमेटी ने सचिन वाजे को 7 जून 2020 को मुंबई पुलिस में वापस रखने का फैसला लिया। उस दौरान यह बहाना बनाया गया कि कोविड की वजह से मुंबई पुलिस को ज्यादा पुलिसकर्मियों की जरूरत है। परमबीर सिंह इस रिव्यू कमेटी के प्रमुख थे। इस सारी घटना के बाद वाजे की पहली पोस्टिंग नयागांव पुलिस हेडक्वॉर्टर में हुई थी और कुछ ही दिन बाद उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस शाखा में भेज दिया गया। यहां  पर उन्हें टीआरपी केस, स्पोर्ट्स कार घोटाले में दिलीप छाबड़िया का केस , अन्वय नाइक आत्महत्या मामला और बॉलीवुड  का कास्टिंग काउच रैकेट का केस सौंप दिया गया।

 

 मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में फंसे सचिन वाजे 

 

एनआई सूत्रों के अनुसार, सचिन वाजे पर 25 फरवरी 2021 को कारमाइकल रोड पर यानी कि उधोगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो को खड़ी करने वाले लोगों में शामिल होने का आरोप हैं। सूत्रों ने किए दावे के मुताबिक कि वाजे भी इस मामले में अपनी भूमिका स्वीकार कर चुके हैं। फिर भी, इस मामले में एनआईए की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्कॉर्पियो मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में भी सचिन वाजे का नाम जुड़ा हुआ है। मनसुख की पत्नी ने भी अपने पति की हत्या के पीछे सचिन वाजे का हाथ होने का आरोप लगाया है।

 

 20 साल से कोल्हापुर नहीं गए सचिन वाजे 

 

 सचिन वाजे महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पैदा हुए थे। साल 1990 से पहले तक वह इसी शहर में पले-बड़े थे। पुराने शिवाजी पैठ इलाके में उनका पुश्तैनी मकान है, जिस पर ताला लटका रहता है। पड़ोसियों के मुताबिक सचिन वाजे आखिरी बार करीब 20 साल पहले कोल्हापुर आए थे।

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